हिस्ट्रीशीटर को बचाने के लिए एक पुलिसकर्मी ने पुलिस स्टेशन में लगे CCTV नेटवर्क की पांच हार्ड डिस्क से रिकॉर्डिंग का CCTV फुटेज ही डिलीट कर दिया। पुलिसकर्मी और एक अज्ञात टेक्नीशियन के खिलाफ FIR दर्ज की गयी है।
घटना महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी के भोइवाड़ा पुलिस स्टेशन की है। भोइवाड़ा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विक्रम मोहिते की शिकायत पर उमेश नागरे और अज्ञात तकनीशियन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 241, 238, 239, 324(4) और 3(5) के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 65 और 66 के तहत FIR (संख्या-0504/2026) दर्ज की गयी है। पुलिस नाइक उमेश नागरे तब भोइवाड़ा पुलिस स्टेशन में ही कार्यरत था। वर्तमान में वह उल्हासनगर पुलिस कण्ट्रोल रूम में कार्यरत है।
FIR के मुताबिक, भिवंडी के भुसार मोहल्ला की रहेवाली फ़रीदाबानो अल्ताफ अहमद मोमिन ने पुलिस कमिश्नर ऑफिस के ग्रिवेंस सेल में शिकायत की थी उमेश नागरे ने हिस्ट्रीशीटर अख्तर अली अब्बास अली मोमिन से पैसा लेकर उसे पुलिस स्टेशन से भगा दिया। इस शिकायत की जांच निजामपुरा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर (क्राइम) जी. के. जोगदंड को सौंपी गयी। जी. के. जोगदंड ने भोइवाड़ा पुलिस स्टेशन से लिखित में उस दौरान के CCTV फुटेज की मांग की। इसका पता चलते ही उमेश नागरे घबरा गया। उसने सबूत मिटाने के लिए टेक्नीशियन की मदद से पुलिस स्टेशन में लगे CCTV नेटवर्क की पांच हार्ड डिस्क से रिकॉर्डिंग का CCTV फुटेज ही डिलीट कर दिया।
यहां तक कि 14 मार्च 2025 को रात 11:08 बजे से पहले की रिकॉर्डिंग भोइवाड़ा पुलिस स्टेशन में तात्कालीन वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अशोक रत्नपारखी की केबिन में रखे नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर (NVR) सिस्टम की पांच हार्ड डिस्क से उमेश नागरे ने मिटा दी। इसके कारण महत्वपूर्ण सरकारी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड नष्ट हो गए, जो इस मामले में अहम सबूत साबित हो सकते थे।
जी. के. जोगदंड की जांच में उमेश नागरे दोषी पाया गया है। अब मामले की जांच पुलिस निरीक्षक विनोद पाटिल कर रहे हैं।
